आरक्षण के लिए क्या महज यह कह देना ही काफी है कि इस तबका का शोषण हुआ है?

सुप्रीम कोर्ट में प्रोन्नति में आरक्षण पर सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की तरफ से अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल का कहना था— यह तबका 1000 से अधिक सालों से प्रताड़ना झेल रहा है। एससी-एसटी पहले से ही पिछड़े हैं इसलिए प्रोन्नति में आरक्षण देने के लिए अलग से किसी आंकड़े की जरूरत नहीं है। कमाल […]

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अभी वोट से भी कीमती नोटा है…

वे जो वर्षों से जातिवादी, भ्रष्टाचारी, अपराधी नेताओं को चुनकर संसद भेजते रहे हैं, उन्हें भी अभी अपने वोट की कीमत समझ आ गई है। सत्ता से लेकर विपक्ष तक के पक्ष में एक आवाज आ रही है कि भाई नोटा न दबाओ, वोट बेकार चला जाएगा। माने फिर से इन्हें जिता दो ताकि ये […]

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स्वार्थ से अटलजी का गुणगान, विरोध दोनों सही नहीं…

इस समय एक पक्ष अटलजी की निंदा में लगा हुआ है तो भाजपा अटलजी को भुनाकर 2019 का चुनाव जीतने के फेर में लगी है। सही बात यह है कि न तो अटलजी की निंदा करने से संघ या भाजपा का कुछ उखड़ जाएगा और न ही उनकी प्रशंसा करने से इनका कुछ बन ही […]

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सवर्ण जाति के नाम पर एक नहीं तो यह बड़ी खूबी है!

सरकार दलितों की होगी, सरकार पिछड़ों की होगी, सरकार अल्पसंख्यकों की होगी…! अभी हर नेता यही जुमला दोहरा रहा है। क्या अभी किसी नेता में हिम्मत है जो कहे कि सरकार सवर्णों की होगी? कह दिया तो वह जीत पाएगा? नहीं! हरगिज नहीं! क्यों? क्योंकि बाकी जातियां उसको नफरत से वोट नहीं करेंगी और उसकी […]

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भाड़ में जाए संविधान, इस्लाम जिंदाबाद!

संविधान में यह देश धर्मनिरपेक्ष है मगर हकीकत में राजनीतिक दल, मीडिया, बुद्धिजीवी और यहां तक कि सरकार भी एक विशेष धर्म की तरफ साफ लुढ़के हुए नजर आते हैं। ठीक है कि धर्म विशेष को खुश करना है लेकिन कितना? किस कीमत पर? किस हद तक? तुष्टीकरण की भी कोई हद होती है कि […]

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