परिचय Introduction

हम यानी मृत्युंजय त्रिपाठी बिल्कुल साधारण इंसान हैं। शौक, स्वभाव और पेशे से पत्रकार हैं। पत्रकारिता आम आदमी के रूप में और आम आदमी के लिए करते हैं।

उत्तर प्रदेश के कुशीनगर में जन्म। प्राथमिक शिक्षा भी वहीं। मध्य, उच्च और उच्चतर विद्यालय की पढ़ाई बिहार की राजधानी पटना में। हिंदी प्रतिष्ठा से स्नातक। हिंदी साहित्य के साथ ही पत्रकारिता एवं जनसंचार से स्नातकोत्तर। पत्रकारिता की शुरुआत दैनिक जागरण से। हिंदुस्तान, आई नेक्स्ट, अमर उजाला में कार्य करने का कुल जमा पूंजी एक दशक का अनुभव।

 

हमें ब्लॉग लिखने का बेहिसाब शौक क्योंकि यहां हम वह बेहिचक लिख सकते हैं, जो देखते या सोचते हैं…।

 

हमें लगता है कि कोई पत्रकार कभी निष्पक्ष नहीं हो सकता और न ही होना चाहिए। पत्रकार यदि सूचनाओं को लेकर तटस्थ हो गया तो वह एक डाकिया बनकर रह जाएगा। महज किसी सूचना या खबर को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने वाला। किंतु नहीं, एक पत्रकार महज डाकिया नहीं है। डाकिया कभी चिट्ठी नहीं ​खोलता लेकिन पत्रकार को हर चिट्ठी जनता तक पहुंचाने से पहले उसे खुद पढ़ना चाहिए। एक पत्रकार को पता होना चाहिए कि कौन सी सूचना पहुंचानी है और कब पहुंचानी है और कौन सी सूचना पहुंचानी ही नहीं है। एक पत्रकार को सूचना या खबर के महत्व के साथ ही उसके असर का भी अंदाजा होना चाहिए। मसलन, किस खबर का क्या परिणाम हो सकता है। यदि परिणाम राष्ट्रहित में नहीं तो खबर महज इसलिए सभी तक नहीं पहुंचानी चाहिए क्योंकि वह पत्रकार तक पहुंच गई है। वह वहीं रुक जानी चाहिए। पत्रकार का उद्देश्य समाज—राष्ट्र का हित होना चाहिए। यदि कोई खबर राष्ट्रहित में है तो ठीक, वरना उसके प्रसार की आवश्यकता नहीं। इसी तरह पत्रकार को मजह खबर नहीं देनी चाहिए। पत्रकार को यह भी बताना चाहिए कि उस खबर के पीछे की खबर क्या है। महज किसी मुद्दे से जनता को अवगत कराना ही पत्रकार का काम नहीं है, बल्कि उस मुद्दे पर जनता को जागरूक करना भी पत्रकार का ही काम है। मसलन, किसी नेता ने कुछ कहा, वह जनता तक पहुंचाने के साथ ही यह बताना भी पत्रकार का ही काम है कि उस नेता ने जो कहा वह सही है या गलत। पत्रकार या तो गलत बातों को स्वयं तक ही रोक दे या आगे बढ़ाए तो यह बताते हुए कि वह सूचना गलत है और साथ में यह भी बताए कि सही सूचना क्या है।
मेरी नजर में पत्रकार को कभी विशेष वर्ग का नहीं होना चाहिए, वरना वह कभी आम आदमी की तकलीफ नहीं समझ पाएगा। यानी पत्रकार को धर्म—जाति—विचारधारा से परे होना चाहिए। पत्रकार का ध्यान सिर्फ सही और गलत पर होना चाहिए। हां मगर, मेरी नजर में पत्रकार को कभी तटस्थ नहीं होना चाहिए। पत्रकार को हमेशा सच के साथ और उसी के पक्ष में होना चाहिए। यदि सच ही निष्पक्ष है तो हां हम निष्पक्ष हैं अन्यथा सत्य ही मेरा पक्ष है। हम जो देखते हैं, वही लिखते हैं…।

 

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